Act your age

वह: क्या हर बारिश में इतना खुश होना जरूरी है ? काले बादल आये नहीं कि नाचने लगना ? थोड़ा तो act your age. तुम क्या बच्ची हो जो चक्करघिन्नी की तरह नाचने लगो बारिश को देख कर। वो : क्योंकि बारिश सब कुछ धो देती है, हर उस धूल को जो समय की गर्त […]

“साला ये दुख काहे कम नहीं होता”

वो हर दिन नेट प्रैक्टिस पर मुझसे पहले आ जाता था और घंटों प्रैक्टिस करता। लड़कियों के बीच साला खासा पापुलर।फिर एक दिन वार्म अप के बीच उसने खालिस कोलगेटी स्माईल देते हुए वह फुसफुसाया “अबे सुन” मैं पलटी और कहा “मैं नहीं चाय पिला रही आज” वह ज़ोर से हँसा, वैसी हँसी जो छिटककर […]

इक उदास शहर का वादा

इक उदास  शहर में एक गुलाबी रात चाँद से उतर कर जब एक किस्सा लिखा जा रहा था सतरंगी दुपट्टे में तो वो बेरंग शहर चमक उठा था  टिमटिमाते रंगों में महलों से झांकती उदास खिड़कियाँ यूँ हँस दी  थी किसी के साथ कहते हैं लोग कि गुलाबी बिखर गया था पलाश के पीले पत्तों सा […]

तुम होती तो क्या आज साथ होती

डिअर नानी (तुम अभी होती तो डिअर का मतलब समझाते तुम्हें खालिस जौनपुरिया भोजपुरी में ). कुछ दिन ऐसे होते हैं जब आप बस कहीं छिप जाना चाहते हो, एक ऐसी थकान जब किसी होने के न मायने समझ आते हैं और न किसी न होने के कारण दिखते हैं, ऐसे ही दिन आज तुम […]

बैंगनी फूल

“क्या बकवास खाना है यार, इसे खायेगा कोई कैसे” विशाल ने टिफ़िन खोलते ही कहा. “ अगर ४ दिन और ये “खाना खाना पड़ा तो मुझसे न हो रही इंजीनियरिंग, मैं जा रहा वापस अपनी पंडिताइन के पास.” “सुन हीरो, बाज़ार से लगी गली के आखिरी में एक पीला मकान है, एक आंटी खाना खिलाती […]

D: Do You still love me?

Trnnnnnnnn……….Trnnnnnnnn Rohit annoyingly opened his eyes and shouted “Richa! Richa! Shut up this damn alarm” Richa came into the room and stopped the alarm. “It’s already 8 Rohit, get upset and be ready ” And she went into the kitchen to prepare breakfast. Shuffling through the newspaper while sipping his coffee, Rohit made a mental […]