कहाँ से लाओगे

किसी खूबसूरत सा बनाने की जिद मे लगा दोगे तुम सलीके का टाँका पर कहाँ से लाओगे वो सुबह जिसकी अलगनी में पिछली रात के टुकड़े टँगे हैं उँगलियों की चुहल और बतियाती आँखें जब आँखें मींचे हँसती थी वो ज़ोर से बेढंगी सी घूम आती पूरे गांव और नाचती थी पिघलते अंधेरों पर डाल […]