Agar tum saath ho

उँगलियों का होना तब तक ही वाजिब जितना तुम्हारे हाथ का मेरे हाथों में असहज होना और तुम्हारे जाने के बाद उस अकेले हाथ याद की तकलीफ़. मौत क्या है जब पीछे से तुम्हें कोई पुकारे कितने ही बार बार-बार मिन्नतों के साथ और तुम पलट कर यह देखना बंद कर दो कि – किसने […]

सैराट में ऐसा क्या नया है जो तुम्हें परेशान कर रहा है?

सैराट के बारे में बहुत सुना, बहुत पढ़ा पर फिल्म के ख़त्म होने पर मैं निराश थी।मैं तो गयी थी “आखिर में जीत प्यार की ही होती है” देखने और ये क्या फिल्म ने तो वही दिखा दिया जो इस देश के गाँव- खेड़ो, हुक्का –पानी वाली सरपंचों, वैवाहिकी वाले कॉलम और फेसबुक वाले शहरों […]