हमारी नफरतों के बीच एक माँ

एक अजीब से घिनौने समय में हम जी रहे हैं, जहाँ एक होड़ मची हुई है कि “तेरी वाली देशभक्ति, मेरी वाली देशभक्ति“ से कम कैसे. मुझे गुरमेहर की भी बात बचकानी लगती है और उसे जवाब देने वाले सो कॉल्ड देशभक्तों पर तो तरस आता है जो अपनी बात रखने के लिये पहले दलील […]