लौट कर आना तुम

लौट कर आना तुमजब पत्तों के झड़ने का मौसम आयेखटखटाते बंद खिड़कियों के पालेलौट कर आना तुमजब सवेरे की सर्द हवालाये मुट्ठी मे बंद करतुम्हारा यूँ ज़रा सा मुस्कुरानालौट कर आना तुमजब वक्त भाग कर करे पीछाबारिश छुपाये बादलों कोलौट कर आना तुमचिट्ठियों के मौसम मेनंगे पैर ओस पर चलने कोलौट कर आना तुमयूँ कभी […]

“साला ये दुख काहे कम नहीं होता”

वो हर दिन नेट प्रैक्टिस पर मुझसे पहले आ जाता था और घंटों प्रैक्टिस करता। लड़कियों के बीच साला खासा पापुलर।फिर एक दिन वार्म अप के बीच उसने खालिस कोलगेटी स्माईल देते हुए वह फुसफुसाया “अबे सुन” मैं पलटी और कहा “मैं नहीं चाय पिला रही आज” वह ज़ोर से हँसा, वैसी हँसी जो छिटककर […]