इंतज़ार……..#OctoberMovie

 इंतज़ार तुम्हारे कुछ कहने का कह कर भूल जाने का इंतज़ार सर्दियों में तुम्हारी उँगलियों के ठिठुरने का और काफी के भाप में तुम्हारा अलाव ढूँढने का इंतज़ार पहाड़ के अंतिम छोर पर टिके चाँद का और उसके साथ चलने वाले अकेलेपन का इंतज़ार लहरों के जाने के बाद लौट आने का यूँ जाते वक़्त […]

मेरी कविता बहुत अकेली हो गयी है

तू बन जा मेरी अकेले का लिखा वो बैरन चिट्ठियां जो खुद को भेजूँ यूँ  छुप के मिलूं तुझे डायरी के किसी पन्ने पर और कह डालूं तुझसे सब अनकहा तू बन जा मेरा लॉन्ग पौज़ किसी अधूरी कविता के बीच ठहरा और ताकना मुझे पूरा करने को न पूरा करूँ तो शिकायत न करना […]

कह के जब पलटी थी वो तुमसे

कह के जब पलटी थी वो तुमसे कि तुम नहीं हो कहीं तो उन आँखों के बहने में तुम थे रात के सन्नाटे में जब दिखती है उसे तुम्हारी आवाज़ तो वो टटोलती है तुम्हारे चेहरे को बनाती है कुछ तुम जैसा हवा में और ढूँढती है तुम्हें उन उकेरों में तो जब कहा था […]