एक बंद खिड़की जिसके इस पार खड़ी हूँ मैं

एक बंद खिड़की जिसके इस पार खड़ी हूँ मैं खटखटाती हूँ पुरानी लकड़ी के पाले बाहर की तेज़ बारिश के शोर में गुम हो जाती है ये आवाजें कुछ खटखटाहट थोड़ी सिसकियाँ बंद किवाड़ों के पीछे सीलन भरी दीवारों से लगे बैठी है कोई पुरानी कहानी एक वक़्त के किस्से पुराने पर्दों से टंगे पड़े […]