The Paper Boat

We strive to give it a shape Of a boat A paper boat Ready to sail Against the winds In the rhythm of flow Swaying and smiling Just like life Folding todays Shaping tomorrows Tearing yesterdays Ignoring the rough edges And there it goes In a stretch of emotions Towards the vastness called relations Silently […]

SAKSHAAT 7.0: नाम तो सुना ही होगा ..मिलिये द लल्लनटॉप की टीम से

  जेठ की तपती दुपहरी में मैं नोयडा फिल्म सिटी पहुँचती हूँ, लल्लनटॉप के ऑफिस. एक खुशनुमा सा इनफॉर्मल सा ऑफिस जिसमें बीच बीच में “अरे ये पीस ठीक है क्या” के साथ ठहाकों की आवाज़ सुनाई देती है. लल्लनटॉप के सरपंच सौरभ से बातचीत शुरू होती है और बीच में कोई आकर पूछता है […]