गर हो सके तो बचा लेना………….

ख्वाहिशों की उखड़ती साँस और उम्मीदों के दम तोड़ने से ठीक पहले गर हो सके तो बचा लेना एक आधा कन्धा सर टिकाने के लिए बना देना मेरे ओर बाहों का आधा घेरा बिना किसी मतलब के भले ही न लेना कसमें सात जन्मों की पर पीरियड्स के समय तुम थोड़ा और हो लेना साथ […]

पर मुहब्बत तो हमने भी तुमसे कम नहीं की है

मेरी अमृता अमृता प्रीतम ………… एक इश्क सा है तुमसे जब से समझा कि जादू तो शब्दों का होता है, जबसे जाना कि हर वो शख्स मुझे इंस्पायर करता है जो डरता नहीं, डरता नहीं व्यक्त करने में, डरता नहीं जीने में, डरता नहीं टूट कर इश्क करने में. सबने तुम्हें साहिर और इमरोज़ के […]

तो आखिर ग़ालिब छूट ही गयी शराब ………….रविन्द्र कालिया (1939–2016)

कुछ दिन पहले सत्यानन्द निरुपम के फेसबुक वाल पर रात के एक बजे पढ़ा कि कालिया जी की अस्वस्थता की खबर चिंताजनक है.उस रात सोते हुए मैंने एक छोटी प्रार्थना उनके स्वाथ्य के लिये की.याद आया पटना में हुई उनसे छोटी मुलाकात और उनके मजाकिया अंदाज़.परसों शाम पता चला वो प्रार्थना खारिज़ हो गयी और […]