तुमने यूँ छुआ है वजूद को, जैसे कोई वतन की मिट्टी को छूता है

तुम आज 100 बरस की हो गयी अमृता. आज सब अपने अपने तरीकों से तुम्हे याद कर रहे हैं. लिखने वाले तुम्हारी कविताओं को कोट कर रहे तो देखती हूँ कि तुम्हारी मिसफिट इश्क की कहानी उससे भी कहीं ऊपर पहुँच गयी है. हम सभी तुम सा होना चाहते हैं. हम सभी तुम सा हो […]