कुछ लम्हों में सिर्फ प्रेमिका बन कर रह जाती है वो

कुछ लम्हों  में सिर्फ प्रेमिका बन कर रह जाती है वो उतार फेंकती है वो सब कुछ जो ओढ़ लिया है ज़िन्दगी की तरह जब जॉर्डन के साथ देती है जवाब “और कहीं रह नहीं पाउँगा मैं”….हीर के पूछने पर जब मिन्नत करती है वेद को कि मिला दे उसे खुद से कभी और तारा […]

इक उदास शहर का वादा

इक उदास  शहर में एक गुलाबी रात चाँद से उतर कर जब एक किस्सा लिखा जा रहा था सतरंगी दुपट्टे में तो वो बेरंग शहर चमक उठा था  टिमटिमाते रंगों में महलों से झांकती उदास खिड़कियाँ यूँ हँस दी  थी किसी के साथ कहते हैं लोग कि गुलाबी बिखर गया था पलाश के पीले पत्तों सा […]

मेरी कविता बहुत अकेली हो गयी है

तू बन जा मेरी अकेले का लिखा वो बैरन चिट्ठियां जो खुद को भेजूँ यूँ  छुप के मिलूं तुझे डायरी के किसी पन्ने पर और कह डालूं तुझसे सब अनकहा तू बन जा मेरा लॉन्ग पौज़ किसी अधूरी कविता के बीच ठहरा और ताकना मुझे पूरा करने को न पूरा करूँ तो शिकायत न करना […]

कह के जब पलटी थी वो तुमसे

कह के जब पलटी थी वो तुमसे कि तुम नहीं हो कहीं तो उन आँखों के बहने में तुम थे रात के सन्नाटे में जब दिखती है उसे तुम्हारी आवाज़ तो वो टटोलती है तुम्हारे चेहरे को बनाती है कुछ तुम जैसा हवा में और ढूँढती है तुम्हें उन उकेरों में तो जब कहा था […]

My old home

one evening when sun painted the sky with goodbye of orange i passed through a familiar lane leading to a “no more my address” to an old home where my childhood stays it was there my old home, old and wrinkled for years which never trembled perched near a dhaak tree shade the colors that […]

I just want to sleep

A little drizzle lays bare On a face with a salty tint the naked arms which shiver Of cold , of pain, of breathless whispers  I try to speak and I choke of dreams Amid the fading away of screams  Turn by turn scars shout  It’s Me! It’s Me! It’s Me! out loud I dust […]