Act your age

वह: क्या हर बारिश में इतना खुश होना जरूरी है ? काले बादल आये नहीं कि नाचने लगना ? थोड़ा तो act your age. तुम क्या बच्ची हो जो चक्करघिन्नी की तरह नाचने लगो बारिश को देख कर। वो : क्योंकि बारिश सब कुछ धो देती है, हर उस धूल को जो समय की गर्त […]

गर हो सके तो बचा लेना………….

ख्वाहिशों की उखड़ती साँस और उम्मीदों के दम तोड़ने से ठीक पहले गर हो सके तो बचा लेना एक आधा कन्धा सर टिकाने के लिए बना देना मेरे ओर बाहों का आधा घेरा बिना किसी मतलब के भले ही न लेना कसमें सात जन्मों की पर पीरियड्स के समय तुम थोड़ा और हो लेना साथ […]

“साला ये दुख काहे कम नहीं होता”

वो हर दिन नेट प्रैक्टिस पर मुझसे पहले आ जाता था और घंटों प्रैक्टिस करता। लड़कियों के बीच साला खासा पापुलर।फिर एक दिन वार्म अप के बीच उसने खालिस कोलगेटी स्माईल देते हुए वह फुसफुसाया “अबे सुन” मैं पलटी और कहा “मैं नहीं चाय पिला रही आज” वह ज़ोर से हँसा, वैसी हँसी जो छिटककर […]

मेरी Ordinary सी ज़िन्दगी के सबसे Extraordinary हीरो- Happy Father’s Day

Father’s Day जैसा कुछ है आज. पापा के बारे में ऐसा क्या लिखूं जो कभी कहा नहीं गया हो. कोई कविता, कोई कहानी, कोई किस्सा, कोई कोट कुछ भी तो नया नहीं. पिता , जिनका होना भर ही कितना सुकून देता है. आहूत से पिता को देखा है, अपने दोस्त जैसे पापा को भी और […]

दुनिया के सभी पापा के नाम

ट्रेन यात्रा के मेरे किस्सों में कल बहुत प्यारी सी कहानी जुड़ गयी. बीच सफ़र में, एक परिवार मेरी सामनी वाली सीट पर आ कर बैठा, पति, पत्नी और उनकी छोटी सी बेटी जिसका नाम पिहू था.पर सिर्फ ये तीन साथ में सफ़र कर रहे हो ऐसा नहीं था- पिहू के दो दोस्त भी थे- […]

हम पागलों के बीच वो नंगी, अधमरी औरत नहीं रह सकती

कॉलेज से घर जा रही थी, इंटर्नशिप के समय, जब रास्ते में मुझे वो दिखी. आज भी उसके बिखरे हुए बाल, शरीर पर मांस की एक पतली लेयर और उसके चिथड़ों से कपड़े याद हैं मुझे. किसी ने दया खा कर एक शर्ट और कुछ पेटीकोट सा पहना दिया था उसे, हाईवे पर चल रही […]

एक बंद खिड़की जिसके इस पार खड़ी हूँ मैं

एक बंद खिड़की जिसके इस पार खड़ी हूँ मैं खटखटाती हूँ पुरानी लकड़ी के पाले बाहर की तेज़ बारिश के शोर में गुम हो जाती है ये आवाजें कुछ खटखटाहट थोड़ी सिसकियाँ बंद किवाड़ों के पीछे सीलन भरी दीवारों से लगे बैठी है कोई पुरानी कहानी एक वक़्त के किस्से पुराने पर्दों से टंगे पड़े […]

तुम होती तो क्या आज साथ होती

डिअर नानी (तुम अभी होती तो डिअर का मतलब समझाते तुम्हें खालिस जौनपुरिया भोजपुरी में ). कुछ दिन ऐसे होते हैं जब आप बस कहीं छिप जाना चाहते हो, एक ऐसी थकान जब किसी होने के न मायने समझ आते हैं और न किसी न होने के कारण दिखते हैं, ऐसे ही दिन आज तुम […]

बैंगनी फूल

“क्या बकवास खाना है यार, इसे खायेगा कोई कैसे” विशाल ने टिफ़िन खोलते ही कहा. “ अगर ४ दिन और ये “खाना खाना पड़ा तो मुझसे न हो रही इंजीनियरिंग, मैं जा रहा वापस अपनी पंडिताइन के पास.” “सुन हीरो, बाज़ार से लगी गली के आखिरी में एक पीला मकान है, एक आंटी खाना खिलाती […]