मेरी कविता बहुत अकेली हो गयी है

तू बन जा मेरी अकेले का लिखा वो बैरन चिट्ठियां जो खुद को भेजूँ यूँ  छुप के मिलूं तुझे डायरी के किसी पन्ने पर और कह डालूं तुझसे सब अनकहा तू बन जा मेरा लॉन्ग पौज़ किसी अधूरी कविता के बीच ठहरा और ताकना मुझे पूरा करने को न पूरा करूँ तो शिकायत न करना […]

दुनिया के सभी पापा के नाम

ट्रेन यात्रा के मेरे किस्सों में कल बहुत प्यारी सी कहानी जुड़ गयी. बीच सफ़र में, एक परिवार मेरी सामनी वाली सीट पर आ कर बैठा, पति, पत्नी और उनकी छोटी सी बेटी जिसका नाम पिहू था.पर सिर्फ ये तीन साथ में सफ़र कर रहे हो ऐसा नहीं था- पिहू के दो दोस्त भी थे- […]

हम पागलों के बीच वो नंगी, अधमरी औरत नहीं रह सकती

कॉलेज से घर जा रही थी, इंटर्नशिप के समय, जब रास्ते में मुझे वो दिखी. आज भी उसके बिखरे हुए बाल, शरीर पर मांस की एक पतली लेयर और उसके चिथड़ों से कपड़े याद हैं मुझे. किसी ने दया खा कर एक शर्ट और कुछ पेटीकोट सा पहना दिया था उसे, हाईवे पर चल रही […]

एक बंद खिड़की जिसके इस पार खड़ी हूँ मैं

एक बंद खिड़की जिसके इस पार खड़ी हूँ मैं खटखटाती हूँ पुरानी लकड़ी के पाले बाहर की तेज़ बारिश के शोर में गुम हो जाती है ये आवाजें कुछ खटखटाहट थोड़ी सिसकियाँ बंद किवाड़ों के पीछे सीलन भरी दीवारों से लगे बैठी है कोई पुरानी कहानी एक वक़्त के किस्से पुराने पर्दों से टंगे पड़े […]

तुम होती तो क्या आज साथ होती

डिअर नानी (तुम अभी होती तो डिअर का मतलब समझाते तुम्हें खालिस जौनपुरिया भोजपुरी में ). कुछ दिन ऐसे होते हैं जब आप बस कहीं छिप जाना चाहते हो, एक ऐसी थकान जब किसी होने के न मायने समझ आते हैं और न किसी न होने के कारण दिखते हैं, ऐसे ही दिन आज तुम […]

बैंगनी फूल

“क्या बकवास खाना है यार, इसे खायेगा कोई कैसे” विशाल ने टिफ़िन खोलते ही कहा. “ अगर ४ दिन और ये “खाना खाना पड़ा तो मुझसे न हो रही इंजीनियरिंग, मैं जा रहा वापस अपनी पंडिताइन के पास.” “सुन हीरो, बाज़ार से लगी गली के आखिरी में एक पीला मकान है, एक आंटी खाना खिलाती […]

हमारी नफरतों के बीच एक माँ

एक अजीब से घिनौने समय में हम जी रहे हैं, जहाँ एक होड़ मची हुई है कि “तेरी वाली देशभक्ति, मेरी वाली देशभक्ति“ से कम कैसे. मुझे गुरमेहर की भी बात बचकानी लगती है और उसे जवाब देने वाले सो कॉल्ड देशभक्तों पर तो तरस आता है जो अपनी बात रखने के लिये पहले दलील […]

इस बारगी ये पत्त्थर तो तबियत से उछला है यारों

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल के पहले दिन ही अमेरिका ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा विरोध देखा, वाशिंगटन डीसी में 5 लाख से भी ज्यादा लोगों  ने  आज #Women’sMarch के तले एक विरोध मार्च में हिस्सा लिया और नये राष्ट्रपति को कड़े शब्दों में कहा कि समानता और अधिकारों की ये लड़ाई जारी […]

मेरा हीरो बूढ़ा हो चला है

हम सब के हीरो होते हैं, हमारी जिंदगी के वो हिस्से जिस पर हमारा हक होता है, वो शख्स जो हमें भरोसा दिलाता है कि उसके होने भर से ही सब कुछ ठीक हो जायेगा। एक बरगद का पेड़ मेरा हीरो है, जहाँ मैं भाग कर जाती हूँ जब कुछ ठीक न हो, जिसके पीछे […]

तुलसी का पौधा

वह हर रोज़ नींद से हड़बड़ा कर उठा जाती, बुरे सपने उसका पीछा ही नहीं छोड़ रहे थे. रोज़ अधूरी सी नींद के बाद सुबह उठती तो थकी हुई, चिढ़ी हुई. सपने में सब कुछ भरभराकर गिर जाता और वो उसे थाम नहीं पाती थी. ” बहुत ख़राब सपने आते हैं यार, परेशान हो गयी […]