An ode to a city with no names

एक शहर वो भी होते हैं

जहाँ प्रेमी फिर से मिलने का वादा करते हैं

जो गवाह होते हैं

आखिरी वक्त तक इंतजार करने की बातों के रीत जाने का

और शहर फिर हँसता है धीरे से

एक शहर वो भी होता है

जहाँ सूरज छिपता है

लड़की के बालों में लगे फूलों के पीछे

और पहाड़ों के बीच उस कैफे मेंं

दो काफियाँ ठंडी हो जाती हैं

सालों बाद फिर यही मिलेंगे के वादों के बीच

मद्धिम होता सूरज हँसता है धीरे से

एक शहर वो भी होता है

जहाँ के सबसे ऊँचे पाईंट पर

बैठकर वे दोनों रात से नहाये शहर को देखते हैं

वे सोचते हैं कि वे बैठें हैं किले के पार एक टीले पर

और गीतों में बसी कितनी कहानियों सी

उनकी भी एक कहानी होगी

जो कैद हो जाएगी किले की दीवारों में

इन शहरों के नाम नहीं होते

इन शहरों में एक नदी बहती है अक्सर

इन शहरों में डूबते सूरज को देखने के कई टुकड़े होते हैं

इन शहरों की उम्र छोटी होती है

इन शहरों का उजालों में ज़िक्र नही होता

वो रह जाते हैं उन अधूरी बातों में जो जुबान पर नहीं आती

गर कभी कोई भटक कर

लौट आता है इन शहरों में

तो उसे किला नहीं मिलता

नदी नहीं मिलती

सूरज ठहरता नही देर तक

उसे कहानियां नहीं मिलती

वो फिर लौट जाता है उन शहरों को

जिनके नाम होते हैं

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