गर हो सके तो बचा लेना………….

ख्वाहिशों की उखड़ती साँस

और उम्मीदों के दम तोड़ने से ठीक पहले

गर हो सके तो बचा लेना

एक आधा कन्धा सर टिकाने के लिए

बना देना मेरे ओर बाहों का आधा घेरा

बिना किसी मतलब के

भले ही न लेना कसमें सात जन्मों की

पर पीरियड्स के समय तुम थोड़ा और हो लेना साथ

ज़िन्दगी भर का साथ की खोखली बातों के ऊपर

गर हो सके तो मत रोकना मुझे रोने से

एक रिश्ते को बनाने की उम्र होती है बहुत लम्बी

पर नाउम्मीदी की जड़े सोंख लेती हैं जीवन मिनटों में

मत रुकना आपने सफ़र पर कभी

मत झुकना बाँधने अपने जूतों के लेस

गर हो सके तो देख लेना पलट कर पीछे

क्यूंकि

गया वक़्त

और छूट गया प्रेम

लौट कर नहीं आता

1 Comment

Leave a Reply to Priyal Cancel reply