मेरी Ordinary सी ज़िन्दगी के सबसे Extraordinary हीरो- Happy Father’s Day

Father’s Day जैसा कुछ है आज. पापा के बारे में ऐसा क्या लिखूं जो कभी कहा नहीं गया हो. कोई कविता, कोई कहानी, कोई किस्सा, कोई कोट कुछ भी तो नया नहीं. पिता , जिनका होना भर ही कितना सुकून देता है. आहूत से पिता को देखा है, अपने दोस्त जैसे पापा को भी और अपने खानदान में “बाउजी” को भी जिनसे सब डरते हैं. सन्डे है आज और यहाँ इस जगह सन्डे को मैं गली के कुत्तों को नहला देती हूँ. उन्हें पता है मैंने दो रोटियां उनके लिए भी बनाई होंगी. सब नाराज़ होते हैं गली के आवारा कुत्तों के जमघट से, पर सच कहूँ तो ये पापा से सीखा है.

ऐसा ही कोई सन्डे था. बहुत बारिश हो रही थी. हमारे छोटे से घर के पास एक बड़ा सा नाला हुआ करता था जिसमें पानी भर गया था. उस नाले में एक बिल्ली के कल रात ही पैदा हुए तीन बच्चे फंसे थे. इतने छोटे की आँखें भी नहीं खुली थी. बिल्ली जोर जोर से चिल्ला रही थी. जब पापा ने पास जाकर देखा तो वो नाले की ओर देख कर बार बार पापा की ओर देखती थी. हमे पता था कि बिल्ली ने बच्चे दिए थे क्यूंकि छोटे मोहल्लों में हर कुत्ते और बिल्ली के बच्चे को माँ से छुपा कर घर ले आने के मास्टर प्लान बनते हैं.

पापा नाले में उतर गए, गले तक पानी भरा था. और वो बिल्ली के बच्चों को निकल कर घर ले आये. बिल्ली उन्हें बहुत देर तक अपने शरीर से गर्मी देती रही, हम खुश थे की ये चारों अब यहीं रहेंगे. शाम को जब पानी उतरा तो बिल्ली अपने बच्चों को घर से ले गयी. हम सब उदास हो गए.न पापा ने हमसे कुछ कहा, न कुछ सिखाया. पर उस एक सन्डे को उन्होंने हमें सबसे बड़ी सीख दी- उन लोगों की मदद करना जो बदले में तुम्हें कुछ न दे सकें और फिर उन्हीं से कोई उम्मीद न रखना.

न हमने कभी Father’s day मनाया न हमसे उन्होंने ये उम्मीद रखी कि हम भी किसी गहरे पानी में उतर कर किसी की मुस्कराहट को rescue कर लायेंगे. पर इन छोटे छोटे moments, ज़िन्दगी की किश्तों में, ऐसे ही कितने सन्डे को उन्होंने हमें ये दिखाया कि एक इंसान होना कितना आसान है और इस ordinary सी ज़िन्दगी के वो हमारे सबसे extraordinary हीरो बन गए.
किसी और सन्डे की कहानी किसी और दिन. आज के सन्डे बस Happy Father’s day पापा

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