इंतज़ार……..#OctoberMovie

 इंतज़ार

तुम्हारे कुछ कहने का

कह कर भूल जाने का

इंतज़ार

सर्दियों में तुम्हारी उँगलियों के ठिठुरने का

और काफी के भाप में तुम्हारा अलाव ढूँढने का

इंतज़ार

पहाड़ के अंतिम छोर पर टिके चाँद का

और उसके साथ चलने वाले अकेलेपन का

इंतज़ार

लहरों के जाने के बाद लौट आने का

यूँ जाते वक़्त थोड़ी ज़मीन खींच ले जाने का

इंतज़ार

हर उसका

जो रह गया अनकहा

जो छूट गया अधूरा

इंतज़ार

गीली ओस पर बैठे हमारे बीच

हर सिंगार के फिर से बिखर जाने का

सितम्बर को पीछे छोड़

सर्द नवम्बर में एक पैर रखकर

हम भी तो कहीं होते हैं अक्टूबर

और करते हैं इंतज़ार

बस वहीँ ठहर जाने का

 

2 Comment

  1. किशोर says: Reply

    सुंदर।

    1. Dr. Pooja Tripathi says: Reply

      आपसे आना दिन बना देता है

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