मेरी कविता बहुत अकेली हो गयी है

तू बन जा मेरी अकेले का लिखा

वो बैरन चिट्ठियां जो खुद को भेजूँ

यूँ  छुप के मिलूं तुझे डायरी के किसी पन्ने पर

और कह डालूं तुझसे सब अनकहा

तू बन जा मेरा लॉन्ग पौज़

किसी अधूरी कविता के बीच ठहरा

और ताकना मुझे पूरा करने को

न पूरा करूँ तो शिकायत न करना

तू बन जा मेरी फेवरेट नोटबुक

एक खूबसूरत याद से ख़रीदा हुआ

जो खुद में एक कहानी कहता हो

तू बन जा वो किसी सन्डे का पीला फूल

जो दबा हो मेरी किताबों में

और समेटा हो खुद में छुट्टी का वो लम्बा किस

तू बन जा मेरे टेबल का वो कोना

जहाँ अमृता इमरोज़ रहते हैं हमेशा

तू यूँ तो है हर जगह मेरे लिखे में

हर शब्द में, हर पूर्णविराम में

तू चल कर आ जा मेरे लिखने  में भी

मेरी कवितायेँ बहुत अकेली हो गयी हैं

 

 

1 Comment

  1. Wow! This was both creative and from the heart. I’m sure this will be good in English too…or in any language for that matter.

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