यादों की निर्जन बस्ती में,पोटली लिए फिरा करती है झुमका,रिंग, हँसी,काजल,इमरोज़ के इश्क से इश्क करती है

यादों की निर्जन बस्ती में,पोटली लिए फिरा करती है झुमका,रिंग, हँसी,काजल,इमरोज़ के इश्क से इश्क करती है

Month: August 2017

एक बंद खिड़की  जिसके इस पार खड़ी हूँ मैं

एक बंद खिड़की जिसके इस पार खड़ी हूँ मैं

एक बंद खिड़की जिसके इस पार खड़ी हूँ मैं खटखटाती हूँ पुरानी लकड़ी के पाले बाहर की तेज़ बारिश के शोर में गुम हो जाती है ये आवाजें कुछ खटखटाहट थोड़ी सिसकियाँ बंद किवाड़ों के पीछे सीलन भरी दीवारों से लगे बैठी है कोई पुरानी […]

तुम होती तो क्या आज साथ होती

तुम होती तो क्या आज साथ होती

डिअर नानी (तुम अभी होती तो डिअर का मतलब समझाते तुम्हें खालिस जौनपुरिया भोजपुरी में ). कुछ दिन ऐसे होते हैं जब आप बस कहीं छिप जाना चाहते हो, एक ऐसी थकान जब किसी होने के न मायने समझ आते हैं और न किसी न […]

I just want to sleep

I just want to sleep

A little drizzle lays bare On a face with a salty tint the naked arms which shiver Of cold , of pain, of breathless whispers  I try to speak and I choke of dreams Amid the fading away of screams  Turn by turn scars shout  […]

Hey Beautiful…..Hey Sexy…..Ghar me Maa Behan nahi hai kya?

Hey Beautiful…..Hey Sexy…..Ghar me Maa Behan nahi hai kya?

Its Rakshabandhan today and I see happy faces, with colored threads tied on wrists of brothers and sisters dressed in the best of their attires. The numerous stories that lead to the origin of Rakshabandhan as a festival, all have one theme in common- protection […]