हमारी नफरतों के बीच एक माँ

एक अजीब से घिनौने समय में हम जी रहे हैं, जहाँ एक होड़ मची हुई है कि “तेरी वाली देशभक्ति, मेरी वाली देशभक्ति“ से कम कैसे. मुझे गुरमेहर की भी बात बचकानी लगती है और उसे जवाब देने वाले सो कॉल्ड देशभक्तों पर तो तरस आता है जो अपनी बात रखने के लिये पहले दलील […]

सब कहते हैं कि तुम यहाँ नहीं हो

चलती हूँ एक अर्धनिद्रा में टटोलती हूँ तुम्हारे चेहरे को बनाती हूँ कुछ तुम जैसा हवा में और ढूँढती हूँ तुम्हें उस चेहरे में दिखता है तुम्हारा अक्स तारों की तरह दूर तक फैले टिमटिमाते हुए पर रोशनी नहीं और जब कुहासा छाये छिप जाते हैं अंधेरे की चादर ओढ़े उस अघड़ तस्वीर में टाँक […]

Because there are deep men too

So few days back i happened to read an article about “Why deep women struggle to have a perfect relationship”, being one of that kind i could totally relate to that article word by word and even shared it saying “Perfect”, we struggle for a sensible friendships too. Here is the link to article: So […]