ये चाय की पत्तियाँ बिलकुल मेरे पापा सी

“ठिठुरती सी सुबह में अलसायी आँखों को खोलने की कोशिश चाय बनाने को उठी मैं दुधीले सफ़ेद को सुनहरा करती ये चाय की पत्तियां लगी मुझे कुछ पहचानी सी रंगों को भरते सबमें मिलकर ,सबसे मिलकर कुछ नया गढ़ते और फिर भी खुद सा ही रहते ये चाय की पत्तियाँ लगी मुझे कुछ जानी पहचानी […]

चाय और Ex

ऐसी ही किसी कोहरे वाली शाम को  चाय पर तुमसे कह  देगा  वो   बातें सारी बीती हुईं  एक ठहरे  Ex के अक्स की  और गिना देगा वो गलतियां  अपनी कम , उसकी ज्यादा  फिर कोहरे को देखकर खुद से  कहेगा  कि शायद वक़्त गलत था  कि कोई इतना भी गलत नहीं होता  और ऐसा […]

Beginning  Today

Beginning today  I look into the woods  And realize that life is just  A season of spring Before the  autumn  knocks Beginning  today  I learn that some relationships Are like the first shower They bring sporadic joy But are just the first shower As the year changes  Beginning  today I come to know  That there […]