The Paper Boat

We strive to give it a shape Of a boat A paper boat Ready to sail Against the winds In the rhythm of flow Swaying and smiling Just like life Folding todays Shaping tomorrows Tearing yesterdays Ignoring the rough edges And there it goes In a stretch of emotions Towards the vastness called relations Silently […]

हम सब में दरार है जो दिखती नहीं 2: सिर्फ ब्रेकअप से डिप्रेशन नहीं होता

दरार जो बताता है कि कुछ टूट गया है, कुछ दरक गया है, शायद आर पार नहीं, कोई टुकड़ा नहीं पर दरार बताती है कि कुछ टूटा जरुर है. कुछ पिघल गया है अन्दर मोम की तरह जो चाह कर भी वैसा नहीं हो पा रहा जैसा पहले था. पर जरुरत भी क्या है पहले […]

हम सब में दरार है, जो दिखती नहीं

कुछ दिन पहले पोएट्री के  एक इवेंट में गयी थी .यहाँ 15 लोग आये थे, 15 अजनबी जो एक दूसरे को बिलकुल भी नहीं जानते थे, 15 कहानियाँ, 15 कवितायेँ, 15 मन  और सैंकड़ों दरारें. साथ में रहते, एक दूसरे को अपनी ज़िन्दगी में आने का, झाँकने का न्योता देते वे 15 लोग एक दूसरे […]

तुम फिर कोई कविता क्यूँ नहीं लिखते

कल तुम्हारा ख़त मिला और तुमने लिखा कि कबाड़खाने में जब टूटा ब्रश मिला  है, और फटा कैनवास, और सूखे रंगों की शीशियां… मैंने देखा उन्हें आँखों के सामने मुंह चिढ़ाते तुम्हें भभक कर जलते जैसे चिनार के दहकते रंग तस्वीरों से अलग एक दुनिया है जहाँ ज़मीनी झोंके हमें उखाड़ने की कोशिश में है […]

We all are November

Here comes the November the month of autumn leaves the season takes a turn in deep sleep Like promises turn away suddenly when the morning cold speak of incomplete desires The zari border ripped of a benarasee saree i had long kept to save up a memory What are we, a question lingers The tangerine […]