अबे हमने इश्क की दुकान खोल राखी है क्या

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चित्र साभार : वेब दुनिया

कहानी और कविता कहना भी एक अजब ही मुआमला है. आप कहानी को ढूंढते हैं और कविता आपको ढूँढ लेती है, बस इतना ही है ये पूरा खेल. इसे जबरन का खींचिये नहीं. ऐसा नहीं की आज बारिश हो रही है या काले बादल आ गये तो उस चौथे वाले पहले प्यार के लिये कविता लिख दी जाती है. सुनो लड़के, ये जो फेसबुक मेमोरी या फ्रेंड सजेशन है न, यही सबतो कविताओं की तादाद बढ़ा रहा है.

अब वो दिन नहीं रहे जब उसकी आखिरी याद कैद होती थी एक लम्हे में, नीले सलवार सूट में वो लड़की, आँखों के किनारे पर आँसू टिकाये. अब तो भैया फेसबुक ने ले ली है सबकी, “checked in at“ वो क्या होती है किसी के साथ, तुम्हारी एक धड़कन तो “checked out “ हो जाती है.

तो लिखिये, खूब लिखिये. गर्दा उड़ा दीजिये “ एक आह भरी होगी, तुमने न सुनी होगी. जाते जाते हमने आवाज़ तो दी होगी “ लिखकर.पर ये बताइये हर कविता में, हर कहानी में तुम्हे बैकग्राउंड स्टोरी काहे सुननी होती है बे. कविता पढ़ो, वाह क्या लिख दिया है यार कहो और खुश रहो. कहानी पढ़ो ( खरीदकर ही, फ्री कॉपी न माँगा करो ) और कहो “गज्जब वन लाइनर्स मारा है” या फिर कहो “क्या बकवास है” और अपना पाठक धर्म निभाओ. ये जो तुम्हें क्या, क्यूँ, और कैसे जानना  होता है सिर्फ कविता में, विज्ञान में नहीं न इसे ही धर्मशास्त्रों में “चेप” कहा गया है.

अक्सर फेसबुक, ट्विटर या इन्स्टाग्राम पर इस प्रजाति के लोग मिल जाते हैं. अभी कुछ दिन पहले ही एक महाशय मिले जो पूछते हैं :

“ आपकी स्टोरी क्या है “

“मेरी स्टोरी?”

“ जी आपकी स्टोरी, आपकी कहानियां और आपकी कविताओं को पढ़ कर लगता है कि कोई interesting स्टोरी होगी  आपकी, आप मुझे बता सकती हैं, मैं किसी से नहीं बताऊंगा ”

और इधर हम सोच रहे हैं साले तुम्हें जानते तो हैं नहीं, तुम्हारे भेजे हुये मेसेज भी “other” फोल्डर में चले जाते हैं,other समझते हो न? और तुमको हम स्टोरी सुनाएं अपनी, खैर उसे जवाब तो देना ही था.

“ आपका शुक्रिया, बड़ी लम्बी और तकलीफों से भरी कहानी है मेरी”

“ मैं सुन रहा हूँ, देखिये किसी को अपनी कहानी बताने से आपको हल्का लगेगा, आखिर हम दोस्त हैं”

तुम दोस्त कब बन गये बे ,  मैंने मन में सोचा , खैर बामन हैं और सत्यनारायण की कथा कह के कई पीढ़ी गुजारी है तो इस “दोस्त” को तो जवाब देना ही था

“ मेरी स्टोरी………हम्म……तो सुनिये, चेनाब नदी के किनारे हमारी खूबसूरत बस्ती थी- तख़्त हज़ारा. वहां मैं अपने परिवार के साथ रहती थी और वो हमारी बस्ती के मुखिया का बेटा था. हम एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे.अच्छा आप किसी से कुछ कहेंगे तो नहीं ?”

“ नहीं, नहीं, आप निश्चिन्त रहिये.” …………..एक स्माइली के साथ.

“ वह अपने पिता की मौत के बाद हमारे घर के गाय भैंस चराता था. वह इतनी सुन्दर बांसुरी बजता था, फ्लूट you know न?  फिर एक दिन मेरे घरवालों ने मेरी जबरदस्ती शादी कर दी. फिर वो मुझे ढूँढ़ते ढूँढ़ते मेरे ससुराल आया और अपने प्यार की परीक्षा दी. मेरे पति को भी ये विश्वास हो गया कि रांझा से ज्यादा मुहब्बत मुझसे कोई नहीं कर सकता……..”

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और इन्होने तो हीर राँझा की कहानी पूरी होने से पहले ही मुझे ब्लाक कर दिया, कहाँ ये ये मेरी कहानी सुनने आये थे. तो मेरी स्टोरी ये है कि हम जो लेखक लोग होते हैं न, वो अन्दर झांकते हुये , बाहर को देखते हुये लिखते हैं. हर टूटे दिल की दास्ताँ हमारी नहीं होती, हर सिगरेट पीता लड़का हमारा प्यार नहीं होता, हर बालों को कान के पीछे ले जाती लड़की हम नहीं होते. और अगर इन किरदारों की खुरचन में हम होते भी हैं तो हम किसी और कहानी या कविता में लिख देंगे आगे का हिसाब.

हमने साला इश्क की दुकान थोड़े ही खोल राखी है कि तुम टहलते हुये आओ और पूछो “ What’s your story”.

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