शाम गुलाबी…..शहर गुलाबी

एक गुलाबी शहर
चार गुलाबी रातें
चाँद से उतर कर जब एक गुलाबी
उतर आई थी सतरंगी दुपट्टे में
तो वो गुलाबी चमक उठी थी टिमटिमाते रंगों में
महलों से झांकती उदास गुलाबी
जब हँस पड़ी थी दोस्तों के साथ
कहते हैं लोग कि गुलाबी बिखर गया था
पलाश के पीले पत्तों सा
जैसे जूड़े में लगा दिये हों गुलाबी फूल किसी ने
दो हाथों के थामने की उस गुलाबी रात के बीच
कुछ शर्म से लाल हो उठी थी गुलाबी
जाते हुए जब पलट कर देखा मैंने इस गुलाबी आसमां को
गुलाबी चेहरों के बीच ठहरे कितने गुलाबी लम्हों में
अलविदा कह रहा था एक शहर गुलाबी

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