चाय और Ex

ऐसी ही किसी कोहरे वाली शाम को 

चाय पर तुमसे कह  देगा  वो  

बातें सारी बीती हुईं 

एक ठहरे  Ex के अक्स की 

और गिना देगा वो गलतियां 

अपनी कम , उसकी ज्यादा 

फिर कोहरे को देखकर खुद से  कहेगा 

कि शायद वक़्त गलत था 

कि कोई इतना भी गलत नहीं होता 

और ऐसा कहते वो देखेगा  कोहरे के उस पार 

जिस पार इसे  कुछ  दिखता ही नहीं

सिर्फ उसे  दिखता है कोई चेहरा 

इस अकेले वक़्त में 

उसे पता  है  कि वो खुद से बात कर  रहा है 

और वो वहां होकर भी नहीं  थी 

वापस लौट  आएगा  वो अचानक से

“Can i smoke a cigarette” और 

“एक और चाय पियें ?” के बीच 

फिर बातें  करेगा  वो  इधर की और उधर की 

उदास आँखों में इंतज़ार लिये 

उसे कह ने  देना सब कुछ 

क्यूंकि 

एक अधूरी आस और पूरी आह के छोर पर 

कुछ कदम ही सही 

तुम साथ चले थे 

तुम  हमसफ़र थे 

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Photo Credit- Dr Pooja Tripathi

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