हम सब में दरार है, जो दिखती नहीं

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Courtesy:Andrew Mclachlan Photography

कुछ दिन पहले पोएट्री के  एक इवेंट में गयी थी .यहाँ 15 लोग आये थे, 15 अजनबी जो एक दूसरे को बिलकुल भी नहीं जानते थे, 15 कहानियाँ, 15 कवितायेँ, 15 मन  और सैंकड़ों दरारें. साथ में रहते, एक दूसरे को अपनी ज़िन्दगी में आने का, झाँकने का न्योता देते वे 15 लोग एक दूसरे को बिल्कुल नहीं जज कर रहे थे. समझने की कोशिश कर रहे थे, सहारा देने की कोशिश, 14 जोड़ी आँखें जो हर किसी को कह रही थी “सब ठीक हो जायेगा”.

हमने बातें की, लम्बी बातें और मैंने जाना कि ख़ुशी कितनी सब्जेक्टिव चीज़ होती है. हम फासलों के बीच तैरते हैं, फैसलों पर रुकते हैं ,एक ख़ुशी का दौर तो एक तकलीफ की लहर और इन्हीं सब के बीच हम ज़िन्दगी नाम की किताब के क्लाइमेक्स में पहुँच जाते हैं. हम सभी 18-30 की उम्र के थे. हमने बातें की अपनी कमजोरियों के बारे में, अपने डर के बारे में, अपनी गलतियों के बारे में, अपने सपनों के बारे में और अपने अपनों के बारे में.

मैंने जाना कि हर dysfunctional family, हर टूटते हुये रिश्ते, हर विश्वास की दरें लांघता कोई टच,  हर ऊँची आवाज़ और हर दबी हुई सिसकी के निशान होते हैं, निशान जो पीछे छोड़ जाते हैं मानसिक बीमारी के रूप में. मेंटल इलनेस सिर्फ पागलपन नहीं होता, यह बस यूँ ही रुलाई फूट जाने वाले डिप्रेशन से शुरू होकर मैनियाक तक पहुँच सकता है.

मैं एक दोस्त से मिलती हूँ, चुप रहता है पर कवितायेँ इंटेंस हैं, ऐसी कविता जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जायें पर इस चुप्पी के पीछे कुछ है, ये वो सन्नाटा है जो चाहा  नहीं है, ये वो सन्नाटा है जो लड़ रहा है आपसे भीतर ही भीतर .पता चलता है कि वो बाइपोलर डिसऑर्डर से लड़ रहा है. यह एक प्रकार की मानसिक बीमारी है, जिसमे मन लगातार कई हफ़्तो तक या महिनों तक या तो बहुत उदास या फ़िर अत्यधिक खुश रहता है | उदासी में नकारात्मक तथा मैनिया में मन में ऊँचे ऊँचे विचार आते हैं | और मैनिया के एक ऐसे ही एपिसोड में उसने अपने साथ साथ 4 और लोगों की ज़िन्दगी को जोखिम में दाल दिया. उस दिन इसने सोचा कि मेडिकल हेल्प लेगा और तब से दवा ले रहा है. मैं उसे कहती हूँ कि इस बारे में  बात करने के कारण मैं बहुत इज्ज़त करती हूँ उसकी और वो जब चाहे मुझसे बात कर सकता है.

मिलती हूँ एक ऐसी लड़की से जो चाइल्ड एब्यूज के जख्म को अब तक पाले हुये है. उस बारे में बात करते उसके आँखों में डर तैर जाता है, हडबडाहट  दिखने लगती है, वो आँखें नहीं मिलाती, वो बात करते हुये भी बात पलट देना चाहती है. वो स्ट्रोंग सी दिखती लड़की जो डरी सहमी उस छोटी लड़की को बुलाती है, उसे गले लगाना चाहती है पर ठिठक जाती है और बस देखती है उस बच्ची को सुबकते. मैं उसे गले लगाते हुये कहती हूँ कि हम सबके सफ़र में कुछ अँधेरे हैं पर उनसे डरना नहीं है. वह मुस्कुराती है, कोर पर एक आँसू टिक गया है और उस आँसूं के रिफ्लेकशन.में मुझे वो बच्ची दिखाई देती है

ये जो आसान ज़िन्दगी दिखती है न बाहर से, ये किसी की आसान नहीं है. एक भीड़ में भी तनहा आदमी , अधूरी ख्वाहिशें की खुरचन में जीती वो औरत, किसी की उम्मीदों का बोझ ढोते एक लड़का, एक परफेक्ट से सांचे में खुद को घुसाते एक लड़की, बचपन में किसी शैतान के चंगुल में फंसना या किसी फ़रिश्ते का हाथ सर से उठ जाना या फिर बिना किसी वजह बस उदासी का पैठ जाना………..कितना कुछ तो तैयार करता है मेंटल इलनेस के लिये ज़मीन.

हमें समझना होगा, हमें समझाना होगा, हमें साथ देना होगा हर उस शख्स से जो लड़ रहा है ये लड़ाई, इस लड़ाई में इंसान बीमारी से बाद में हारता है किसी के न परवाह करने से, अपनों की उदासीनता से पहले हार जाता है. आप जिनसे प्यार करते हैं, जो आपकी ज़िन्दगी का एक हिस्सा हैं, उनका हाथ पकड़िये, उन्हें बिना किसी जजमेंट के सुनिये, उनकी जगह खुद को रखिये, उनकी उदासी के पीछे छिपे एक खूबसूरत चेहरे से उन्हें फिर से मिलाइये क्यूंकि सच तो ये है कि……

हम सब में दरार है, जो दिखती नहीं.

 

10 Replies to “हम सब में दरार है, जो दिखती नहीं”

    1. Very important to get to know the ot#e1&h82r7;s body, especially since sensitivity varies so much between persons (though commonalities certainly exist!). I never thought of tickling parts of the face. Thanks. And, yes, wiggling is a great sign!

  1. हम सब कई दरारों को जीते हुए लोग हैं। ये पीढ़ी ख़ासकर अवसाद और अकेलेपन से जूझ रही है। बहुत सुंदर लिखा तुमने पूजा ?

    1. Prashant – "As readers may remember, a Single Judge of the Delhi High Court had earlier temporarily stayed the decision of the Patent Office to revoke Sugen’s patast…"Pleene note that the stay was NOT on the order of the Patent Office but on the sale of generic sutent by CIPLA.You may wish to make this correction in your post. A sincere Anon!

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