पहाड़ों के लिहाफ़ में

 

 

पहाड़ों के लिहाफ़ में

सिमटे हुये, पैरों को सिकोड़े

एक रुका हुआ वक़्त

कुछ दोस्त, कई किस्से

वो प्यार के सबके अपने फलसफे

ज़िन्दगी की दौड़ से अलग हटकर

खुद को देखते, बस देखते

किसी को समझाने की जिद नहीं

यादों के फोल्डर से

निकाल के कुछ अधूरे ख्वाब

हरी घास पर, ओस की बूँद पर बैठे

कुछ दोस्त, कई किस्से

बेबाक होने का सुकून

न कुछ प्रूव करने की घबराहट

कहीं न जाने को उतरती सीढ़ियाँ

खिड़की पर चाँद का धुंधला अक्स

अचानक से आती किसी हेडलाइट की रौशनी

रात के अंतिम पहर में

बेखयाली में हँसते

तसल्ली की 5 चाय

और बेफिक्री की मैगी

पहाड़ों के लिहाफ़ में

सिमटे हुये, पैरों को सिकोड़े

एक रुका हुआ वक़्त

कुछ दोस्त, कई किस्से

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