हम चुप रहे …………..हम हँस दिये

 

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आज यहाँ पर आखिरी दिन है,जाहिर है यहाँ से जाने का मन नहीं कर रहा है आज की घूमने की लिस्ट में एक मंदिर( हाँ मंदिर आपको दुनिया के हर कोने में मिल जायेंगे), एक म्यूजियम और झील के किनारे बसा एक खूबसूरत बुक शॉप है।

तो अब कारवां यहाँ से आगे बढ़ेगा ।पिछले कुछ दिनों से ठीक से सो नहीं रही।मेरी एक अजीब सी आदत है, मैं कहीं फिर रही होती हूँ तो नींद में भारी कटौती करती हूँ।वो कहते हैं न “Not Drifting away from the moment”, बस इसी non drifting का सीधा- सादा तरीका है- जितना हो सके शहर को कैद कर लो, तस्वीरों में नहीं, ज़िन्दगी में।इस जगह दोबारा वापस आना शायद मुस्तकबिल में ना हो, नींद तो कभी भी पूरी की जा सकती है ।.

सुबह उठ कर मैं गेस्ट हाउस के लॉन में टहल रही हूँ ।यहाँ पर लोग बड़े बड़े आलीशान लकड़ी के घरों में रहते हैं,10 कमरों वाले चाहे रहने वाले 2 ही हों।ये सभी घरों में नहीं, रास्तों में अक्सर दौड़ते मिल जायेंगे ।यहाँ सभी को फिट रहने का शौक है।

सामने के गेट से बिलाल आता दिखाई देता है। पूछता है कि आज कहाँ जायेंगी मैडम ।मैं बताती हूँ कि आज क्लोजिंग सेरेमनी के बाद मैं पैदल ही घूमूंगी, आज मुझे टैक्सी नहीं चाहिये।बिलाल कहता है कि शमी (उसकी बीवी) मुझसे बात करना चाहती है. वह फ़ोन लगाकर देता है, मैं शमी का हाल चाल लेती हूँ। शमी मुझे घर आने का कहती है, मैं वादा करती हूँ कि अगली बार ज़रूर आऊँगी। यह “अगली बार” भी अपने में कितना अजीब शब्द हैहम अगली बार के लिये कितना कुछ छोड़ रखते हैं, और हर नये अगली बार के साथ पुराना अगली बार पीछे छूट जाता है.शमी पूछती है कि “मैडम आपकी शादी हो गयी ?” मैं बताती हूँ कि नहीं , जानती हूँ कि फ़ोन के अगले तरफ बैठी शमी को ये सुनकर थोड़ी टेंशन हो गयी होगी.

अरे बिलाल यहाँ के खाने में क्या स्पेशल है? सबसे अच्छा रेस्तरां बताओ।

मैडम इंडियन फ़ूड खायेंगी, वेजीटेरियन फ़ूड?

अरे इंडिया में जाकर इंडियन फ़ूड ही खाना है बिलाल, यहाँ का कुछ बताओ।

बिलाल मुझे एक रेस्तरां का नाम बताता है। मैं उसको ढूँढने के लिये फ़ोन का GPS खोलती हूँ।बैटरी कम का निर्देश आता है।कल रात तो पूरा चार्ज किया था, मैं सोचती हूँ ।फिर ध्यान जाता है कि व्हाट्सएप के ग्रूप्स में 1080 मेसेज हैं।मैं खीज उठती हूँ, स्मार्ट फ़ोन के उपयोग के कितने अनस्मार्ट तरीके ।मैप निकालती हूँ, बिलाल समझने में मेरी मदद करता है, ये पेपर वाला मैप है जो मुझसे कहता है “ बेटा जब तुम पैदा भी नहीं हुये थे तब से हम डायरेक्शन दिखा रहे हैं.”।

बिलाल विदा लेता है, अभी कुछ दिन पहले लिया हुआ एक झुमका मैं बिलाल को देती हूँ कि शमी को मेरी तरफ से दे देना. वह शुक्रिया कहता है और याद दिलाना नहीं भूलता कि गाड़ी की जरुरत पड़े तो मैं गार्ड को बता दूँ,वह उसे फ़ोन कर देगा.दुआ सलाम कह कर वो निकल जाता है और मैं अपनी किताब में खो जाती हूँ.

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थोड़े देर बाद बिलाल वापस आता दिखाई देता है हाथ में कुछ खुले पैसे दबाये .

वह उसे मेरे सामने रखे टिया टेबल पर रख देता है.

यह क्या है बिलाल.

मैडम आप जिस भी रेस्तरां में कल से खा रही हो या कहीं कुछ खरीदने गयी तो हमे कमीशन मिलता है उस जगह से आपको लाने के लिये। आपसे नहीं ले सकता मैडम, ज़मीर नहीं मान रहा।

मैं उससे कहती हूँ कि यह उसके काम का हिस्सा है.वह वापस न करे।वह नहीं मानता और पैसों को छोड़कर मेरे वालिदान को सलाम भेजकर चला जाता है।

मैं बिलाल को जाते हुये देखती हूँ, कमीशन न लेने वाले बिलाल को, आज़ाद कश्मीर से आते उम्मीदों  के गुलाम बिलाल को, अपने को इस मुल्क का बाशिंदा कहने वाले बिलाल को और फिर मैं देखती हूँ टेबल पर पड़े कुछ रुपयों को. मैं न कहती थी कि ये दुनिया बहुत खूबसूरत है।

आज मैं एक मंदिर देखने जाती हूँ ।यहाँ की हिन्दुओं की कम्युनिटी ने एक माता का मंदिर बना रखा है।कुछ इक्के दुक्के लोग दिखते हैं मंदिर में हाथ जोड़े, सर झुकाये। हर एक को लग रहा है कि उसकी दिक्कत दुनिया की सबसे बड़ी दिक्कत है और इस बार मेरी फरियाद ज़रूर पूरी होगी।इस दुनिया की सबसे बड़ी उम्मीद का नाम है भगवान.यहाँ कोई नहीं कहता कि “read the offer documents closely before investing”।चाहे करोड़ों लोग बेघर होकर,रिफ्यूजी बनकर टेंट में, कैंप में रह रहे हो पर भगवान् को एक अदद घर मिल ही जाता है।

और ये लो मुझे यहाँ, यहाँ पर एक साधु बाबा दिखाई देते हैं.चाहे आप कितने बड़े घुमंतू हों, साधुओं जैसा आपको ट्रेवल आइकॉन नहीं मिलेगा। चिलम पीते, गंजा लगाये हर हर महादेव का गान करते ये globetrotters आपको यवतमाल से लेकर यूरोप में मिल जायेंगे।

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कबीर ने कभी साधुओं के लिये कहा था :

“जाति न पूछो साधू की

पूछ लीजियो ज्ञान”

इन फक्कड़ स्टोंड साधुओं के लिये कबीर कहते :

जाति न पूछो साधू की

पूछ लीजियो कहाँ रखा है माल”

अब वापस जाना है, एअरपोर्ट 300 km दूर है। कार में हम चार लोग एअरपोर्ट जा रहे हैं।बाहर कटे हुये पहाड़ों को देखते देखते मैं बोर हो जाती हूँ, पीछे देखती हूँ कि सब अपने फ़ोन पर लगे हुये हैं। सब अकेले अकेले अपने फ़ोन पर।इन्हीं जैसे प्राणियों के लिये अज्ञेय ने कहा होगा “सब अलग अलग एकाकी पार तीरे” मैं ड्राईवर से पूछती हूँ कि यहाँ के लोक संगीत के बारे में कुछ बताये, ड्राईवर कहता है कि अब कोई लोक संगीत नहीं सुनता , सब रॉक वाले हो गए हैं । मैं उसे बताती हूँ कि वैसे तो हम भी Adele को सुनते हैं पर हमारे यहाँ शादी-ब्याह, व्रत, मुंडन हर वक़्त के लिये गाने हैं।पीछे बैठे एक सज्जन कह उठते हैं कि रबीन्द्र संगीत जैसा कुछ नहीं, मैं भोजपुरी गानों की वकालत करती हूँ, कोई पाकिस्तान कोक स्टूडियो को श्रेष्ठ बताता है। और फिर वो ड्राईवर हमे अपना फोक सोंग सुनाता है गाकर।

यही तो उद्देश्य था- हम अपनी संस्कृति पर तब ज्यादा गौरवान्वित होते हैं जब दूसरा हमे कमतर बताता है, हम लड़ते हैं कल्चरल सुप्रीमसी के लिये (इसके लिये मैं गुरुदेव टैगोर से माफ़ी मांगती हूँ )। ड्राईवर बीच में गाना रोककर बताता है कि इस गाने में प्रेमी अपनी प्रेमिका को बुलाना चाहता है मिलने के लिये और गाँव के चौक पर उसी की चर्चा चल रही है ।मैं उससे कहती हूँ कि वह गाना ज़ारी रखे, संगीत को कबसे भाषा की जरुरत पड़ गयी.गाना ख़त्म होने के बाद सब ताली बजाते हैं, फ़ोन साइड में पड़े हैं अब।

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मैं उसे बताती हूँ कि बिलकुल ऐसी ही एक ग़ज़ल जगजीत सिंह की भी है

“कल चौदहवी की रात थी

शब् पर रहा चर्चा तेरा

कुछ ने कहा वो चांद है

कुछ ने कहा वो चेहरा तेरा

हम भी वहीँ मौजूद थे

हम से भी सब पूछा किये

हम चुप रहे, हम हँस दिये

मंज़ूर था पर्दा तेरा”

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अब जब जगजीत सिंह आ ही गए हैं तो मैं बाहर देखने लगता हूँ, जगजीत सिंह हर सिचुएशन में आ ही जाते हैं। ऊपर आसमान की ओर देखती हूँ और सोचती हूँ “ बड़ी जल्दी थी गुरु जाने की, खूब महफ़िल जम रही होगी ऊपर”।

एअरपोर्ट पहुँच कर सिक्यूरिटी चेक के लिये जाती हूँ। वहां एक सिक्यूरिटी पर्सन पूछता है

“Are you travelling alone?

हम चुप रहे …………..हम हँस दिये।

P.S.- पोटली बाबा की में हम आपको ये नहीं बतायेंगे कि कहाँ जाना है, क्या करना है।हम आपको मिलायेंगे उन लोगों से जो एक शहर को जिंदा रखते हैं पर शहर का चेहरा कभी नहीं बन पाते, हम आपको सुनायेंगे कोई ऐसी कहानी जो आम इंसानों से निकलती है।क्यूंकि दुनिया बहुत खूबसूरत है।

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