अपनी माँ का चेहरा मैं अब भूल गयी हूँ………

बात कुछ साल पहले की है.मदर्स डे और उस सभी की तरह सारे “दिनों” का बुखार तभी तभी चढ़ा था। हमने सोचा यही तो मौका है बताने का कि “माँ कितना प्यार करते हैं तुझसे “( भले ही दो दिन पहले एक दोस्त के जन्मदिन के यहाँ जाने को लेकर इतना घमासान हुआ था कि मैंने भगवान को जी भर कोसा था कि किसी अमीर माँ बाप के यहाँ पैदा नहीं कर सकता था क्या मुझे)।

गुल्लक को तोड़ा गया और माँ के लिये चूड़ी ख़रीदा मोतियों वाली। एक आत्मसंतुष्टि कि हमने भी हैप्पी मदर्स डे मना लिया।मिडिल क्लास परिवारों की जो माँ होती हैं ना उनका सिर्फ शादी के बाद का वो पत्नी वाला पार्ट ही शहर आता है, रह जाती वो गाँव में ही हैं बिटिया,रानी, लाडो बनकर। इनको मदर्स डे समझ नहीं आता, बच्चों पर बहुत प्यार आता है ऐसा कुछ अलग करने पर और इस दिन को भी वो अपने “बेफिज़ूल खर्चों “ की एक कभी न ख़त्म होने वाली लिस्ट में डाल देती हैं ।ऐसी लिस्ट अमूमन हर घर में, हर माँ के पास होती है और हर जगह एक ही निष्कर्ष – वो तो मैं ही जानती हूँ कि किस तरह घर चला रही हूँ ।

खैर चूड़ी आ गयी, अलमारी में चली भी गयी और संडे के स्पेशल खाने पर मैंने माँ से पूछा “ माँ, आपको नानी की याद नहीं आती?”. माँ थोड़े देर शांत रही फिर कहा:

“ याद तो आती है पर अपनी माँ का चेहरा मैं अब भूल गयी हूँ, कुछ ठीक सा याद नहीं कि वो कैसी दिखती थी “।

निवाला मुहं में ही रह गया।कोई अपनी माँ का चेहरा कैसे भूल सकता है. एक इंस्टेंट हैट्रेड हुई मुझे अपनी माँ से जो अपनी माँ का चेहरा भी भूल रही थी ।लगा कि फ़ालतू में ही गुल्लक तोड़ दिया,फादर्स डे में काम आ जाता।

मेरी नानी माँ बहुत पहले कैंसर से गुजर गयी थीं, तब जब हम पैदा भी नहीं हुये थे। एक वो भी दौर था जब स्टूडियो जाकर शर्माते हुए, संकुचाते हुये, सर पर पल्ला डाले स्त्रियाँ अपने पति के साथ अपने जीवन की एकमात्र ब्लैक &वाइट तस्वीर खिंचवाती थीं।मेरी नानी माँ उस दौर से पहले ही गुजर गयी।मामी बताती हैं कि उनके मरने के बाद क्रिया कर्म के लिये उनकी एक तस्वीर नाना के मेमोरी के अनुसार बनाई गयी थी। हाँ एक ऐसा भी समय था।

आज जब हम हर मोमेंट को तस्वीरों में कैद करते हैं, हर दिन सेल्फी लेते हैं, एक अच्छी कॉफ़ी पिया, चलो सेल्फी, किसी जगह गये, लो सेल्फी तो हम कोशिश कर के भी किसी को भूल नहीं पाते।ज़िन्दगी तो नहीं रूकती पर भूलना कितना जरुरी है जीने के लिये।किसी रिश्ते का टूटना, किसी का चले जाना, कुछ ख़ास गुम हो जाना, कोई ऐसी बात जो हमें चुभती है अगर हम उसे भूल जायें तो? क्या कितना आसान नहीं होगा फिर से मुस्कुराना, फिर से आगे बढ़ना, फिर से ख़ुशी ढूँढना, फिर से जीने के नये बहाने ढूँढना ।पर ये वक़्त बेवक्त की इतनी सारी तसवीरें जो हमारी खुशियों को फ्रीज कर रही हैं क्या इन सब के ख़त्म होने के बाद किसी unseen pain, किसी आह, किसी टीस के लिये हम  पूरा साज़ो-सामान तैयार नहीं कर रहे? अब आसान नहीं है भूलना, अब आसान नहीं है जीना।

क्यूँ ना आज मदर्स डे पर हम मदर को सेलिब्रेट करें, न डे को और  न तस्वीरों को।

P.S.- अगर मैं एकदम माँ जैसी दिखती हूँ, तो माँ नानी जैसी दिखती होगी और नानी अपनी माँ जैसी …..शायद. दिल को खुश रखने के लिये ये ख्याल अच्छा है।सभी एक जैसे दिखने वाली माँ- बेटियों को भी हैप्पी मदर्स डे।

This post has been written in association withBlogchatter and Chaipoint for their Mothers Day Specia

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3 Replies to “अपनी माँ का चेहरा मैं अब भूल गयी हूँ………”

  1. बहुत प्यारा लिखा है। जियो लड़की । एक नया नज़रिया दिया तुमने इस दिन को जीने का । सच आधुनिकता ने जीवन को सरल तो बना दिया , मग़र गुज़रे वक़्त की कठनाईओ में भी तो एक स्वाद था। लोग लम्हों को भले कैमरे न कैद कर सके मग़र प्यार और एहसास तब भी थे और अब भी है।
    भूलना भी ज़िन्दगी को आसान बनाता है।
    जियो!!!

    1. Kyla,You are such an inspiration and have been a blessing to have spent time with at Celebrate Recovery. I’m so happy for you and hope to see you again sooeaLovn,Rox.ne

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