डियर चंदा कोचर, एक आध चिट्ठी उन हितैषियों को भी लिख दीजिये ….

 

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डियर चंदा कोचर

आपका बेटी के नाम पत्र पढ़ा, बहुते ही अच्छा लिखा है।खूब आशीष भेजते हैं आपको और बिटिया को ।पर चंदा जी हम यह चिट्ठी लिखकर आपका ध्यान उन बेटियों की ओर ले जाना चाहते हैं जो इस देश के मिडिल क्लास से आती हैं, जिनकी सबसे बड़ी दुविधा उनका लड़की होना है ।

और इस दुविधा को बढ़ाने वाले कई भेस में कई आते हैं- कुछ रिश्तेदार, कुछ परिचित जो लड़की होने के डबल बर्डन को याद दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। ऐसे ही एक तिवारी जी थे, जिन्होंने ऐसी सीख दिया था जो सुनने में ही फूहड़ थी।

तो तिवारी जी लड़कियों को सामने बैठाते थे और लड़की धर्म को पूरा बांचने के बाद concluding लाइन में एक घिसा पिटा ज्ञान चिपका देते हैं- लड़कियों की ज़िन्दगी उनके दो हाथों में होती है, एक हाथ में होता है काजल और एक हाथ में कालिख। अब ये उन पर निर्भर करता है कि वो अपने माँ बाप के आँखों में काजल लगाती हैं या फिर चेहरे पर कालिख।

कहने का आशय यह था कि अगर “जात” से बाहर शादी किया तो कालिख वाला हाथ उठ जाता है और अगर जात में तो काजल वाला हाथ। और भी कई बिचित्र ज्ञान लड़की होने को लेकर तिवारी जी जैसे न जाने कितने ही हितैषी अक्सर देते हुये पाए जाते हैं।

अच्छा लगा पढ़कर रिश्तों की, साथ की बातें जो आपने बिटिया से कही। अच्छा लगा यह जानकर कि किस तरह एक लड़की होना आपके रास्ते में कभी आड़े नहीं आया। अच्छी लगी आपकी सीख कि सफलता की एक एक सीढ़ी पर अपनों के साथ बढ़ो और अपनी डेस्टिनी को अपने हाथ में लो।

अब तो जरुर से एक चिट्ठी लिख दीजिये उन हितैषियों को जो माओं को बेटियों को “लिमिट” में रखने का मुफ्त का ज्ञान बांटते रहते हैं, जो “जल्दी शादी कर दो इससे पहले कि बिगड़ जाये” की रट लगते नहीं थकते और जो यह कहते हैं कि “कलेक्टर बन जाये या प्रधान मंत्री, बनाना रोटी ही है”। एक खतरनाक चिट्ठी लिख ही डालो कि इन्हें थोड़ी तो शर्म आये।

इंतज़ार रहेगा उस चिट्ठी का ।

आशीष भेजते हैं

पोटली वाले बाबा

 

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