लो जी हो गया पोटली बाबा का पोपो

हम चले थे बड़ी दुनिया देखने, लाइन भी एकदम पकड़ कर लाये थे ज़बरदस्त “ शहर-ए-जानां से परे भी कई दुनियाएँ है “, कुछ चलना था, बहुत लिखना था और लो हो गया पोपो। हुआ यह कि कुछ महीनों पहले एक मेल आया कि भाई एक “वर्ल्ड कल्चरल फेस्टिवल” जैसा कुछ हो रहा है, ct8avxauyaakizw-1 (1)आप ब्लॉगिंग करना चाहेंगे क्या?हमने सोचा क्यूँ नहीं करेंगे, देखा श्री श्री जी की ढेर सारी किताबों कि लिस्ट थी पढ़ने के लिये। यही पर बस पोटली वाले बाबा ढेर हो गये, आजकल देवदत्त पटनायक को पढ़ रहे हैं और माइथोलॉजी के पीछे का विज्ञान जान रहे हैं तो हमसे न हो पाता श्री श्री पब्लिकेशन की किताबें पढ़ना।

और यही हो गया लोल, हमें लगा कि कोई योग का कैंप जैसा होगा,ज्ञान वगैरह की बातें होगी जो बोरिंग भी होंगी तो कुछ ख़ास इंटरेस्ट नहीं लिया, मेल में कह दिया कि कुछ व्यस्त चल रहे हैं और बहुत शुक्रिया। कुछ दिन पहले जब यमुना पर हो रहे कंस्ट्रक्शन को देखा तो सोचा “ ये तो जब्बर फेस्टिवल होने वाला है” । हमें भी यमुना से बहुत प्यार है क्यूंकि गाय नहीं गंगा हमारी माता है और यमुना मौसी. तो मौसी का ये हाल देख कर लगता है कि इतने बड़े, बड़े स्टेडियम में क्यूँ नहीं करवाया श्री श्री ने यह कल्चरल फेस्टिवल।

आते हैं अपने फेस्टिवल पर वापस, बड़ा दुःख हुआ, इतने देशों के लोग, इतना नाच गाना, कत्थक से लेकर रॉक तक खूब कल्चर का डंका बज रहा है, सब श्री श्री मग्न हो गये हैं और कोई जबरन योग भी नहीं करवा रहा है।मोदी जी भी पहुँच गये और इनसे चार किताबें नहीं पढ़ी गयी। इतना अच्छा, खुशनुमा आयोजन हुआ था चले थे चच्चा बनने। रोमांटिक वाली बारिश भी हुई, सुनते हैं कि इन्द्रधनुष भी निकला और NGT के मौसाजी बनने के बाद भी सब राजी ख़ुशी हो गया और सब ओर कल्चर भी जगमगा उठा।

तो पोटली बाबा ने खायी एक कसम – बस, ट्रेन और लड़की को चाहे छोड़ देंगे पर किसी फेस्टिवल के लिये मना नहीं करेंगे।दुखी मन से अपनी वाणी को विश्राम देते हैं. आप देखें कुछ तस्वीरे artofliving.org से ली हुई हैं ।

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