जन्म से मृत्यु के बीच बहती – सरयू नदी

 

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13 साल बाद मैं अपने पैतृक गाँव “नवली” पहुंची . नवली, गोरखपुर जिले में सरयू नदी के किनारे बसा एक छोटा सा गाँव है. वही सरयू नदी जिसका वर्णन रामायण में है. इस गाँव का प्रत्येक व्यक्ति गर्व से बताता है की श्री राम ने सीता मैया के साथ वनवास जाने के लिये सरयू नदी पार की थी. अपनी पौराणिक महत्ता के कारण यह नदी इस क्षेत्र के लोगों के लिये गंगा स्वरुप है. इस गाँव में यह सरयू नदी नहीं है , “सरजू माता” , “सरजू मैया ” और “सरजू देवी ” हैं.

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एक दिन सुबह- सुबह हम नदी देखने या वहाँ के लहज़े में कहूँ तो सरजू मैया के दर्शन के लिये निकले. कुहासे में डूबे गाँव की दिनचर्या शुरू हो चुकी थी. कहीं गेहूं की बोआई हो रही थी तो कहीं मवेशियों को चारा दिया जा रहा था. हम गाँव के प्राइमरी स्कूल के सामने से गुज़रे तो खुले में क्लास चल रही थी, एक उंघते हुए टीचर बच्चों को पढ़ा रहे थे और बच्चे टीचर के सिवा हर ओर देख रहे थे 🙂
गाँव का चेहरा अब बदल चुका है , पहले एक गाँव में तीन छोटे गाँव हुआ करते थे जो purely जाति आधारित व्यवस्था थी. अब शिक्षा की गहरी पैठ कहें या आर्थिक सुधारों की देन ये तीनों गाँव चाहे अनचाहे ही सही आपस में मिल गए हैं. घर पक्के हो गए हैं, बिजली भी आती जाती रहती है, छतों पर डिश ऐन्टेना मुस्कुरा रहे हैं और मात्र एक-डेढ़ किलोमीटर दूर सरयू घाट पर लोग मोटरसाइकिल से जाते हैं.
सरयू नदी के लम्बे , दूर तक फैले छोर पर बैठे मैंने चारों ओर नज़र घुमायी. अभी कल को ही ख़त्म हुई किसी ज़िन्दगी की राख किनारे फैली थी तो कहीं किसी दुसरे कोने पर नयी ज़िन्दगी के जन्म को सरजू माँ आशीर्वाद दे रही थी. एक कोने पे कोई बेटा अपने पिता की आत्मा की मुक्ति के लिये सरजू माँ से प्रार्थना कर रहा था तो पास में ही कुछ बच्चे तट की रेत से सीपी की मुक्ति के लिये प्रयासरत थे.
ये है इस नदी का महत्व – इसने देखा है साल दर साल नयी कोपलों को फूटते , पुराने पत्तों को झड़ते, कभी किसी सूखे में यहाँ के लोगों की जद्दोजेहद और बाढ़ के उतरने के बाद जीवन को फिर से उठते. इसने दी है इस क्षेत्र को गन्ने की लहलहाती फसलें, ये है इनके समाज की जीवनधारा और यही है वो आलिंगन जो इन्हें आखिरी विदाई देता है.
गाँव से वापस लौटते समय हमारी गाड़ी ने जब सरयू नदी को पीछे छोड़ दिया तो मैंने पलटकर देखा और मुझे एक गहरी इर्ष्या हुई , सरजू मैया के किनारे बसे गाँव वालों से . किस तरह एक नदी इनकी पहचान है, इनका सम्मान है ,इनके जीवन का इतना अभिन्न अंग है , इनकी collective identity का नाम है – सरयू . क्या शहर में रहने वालों के पास ऐसी कोई collective identity है?
नोट: इस देश में बहने वाली बड़ी -छोटी सैकड़ों नदियाँ इस देश की जीवनधारा है . इन नदियों को प्लास्टिक और कचरे से दूषित मत कीजिये. अपने पर्यावरण को, अपनी नदियों का संरक्षण करिये. ये हैं तो हम हैं.

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